“सुना है हर आशिक़ के यहाँ मेरे नबी मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तशरीफ़ लाते रहे,मेरे यहाँ भी चिराग़ाँ हो जाए, या रसूलल्लाह।”
देशवासियों को पैग़म्बरे इस्लाम मोहम्मद साहब के जन्मदिन की बधाई देते हुए नगर निगम देवास के पूर्व सभापति अंसार अहमद ने ये नातिया कलाम पढ़ा।
अपने बधाई संदेश में अंसार अहमद ने कहा की आज मैं सबसे पहले अल्लाह तआला का शुक्र अदा करता हूँ कि उसने हमें हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की उम्मत में पैदा किया। आज का दिन हमारे लिए बेहद खुशी और अहमियत का दिन है। ये वही मुबारक दिन है जब हमारे प्यारे नबी हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम इस दुनिया में तशरीफ़ लाए। उस दौर में समाज अज्ञानता, ज़ुल्म और बुराइयों से घिरा हुआ था। बेटियों को ज़िंदा दफ़न कर दिया जाता था, इंसानियत और भाईचारे की कमी थी, अमन और शांति का नाम नहीं था।
ऐसे दौर में हमारे नबी ﷺ दुनिया में तशरीफ़ लाए और इंसानियत को रोशनी का रास्ता दिखाया। उन्होंने हमें अल्लाह के क़रीब पहुँचने का रास्ता बताया, पाँचों वक़्त की नमाज़ का पैग़ाम दिया, क़ुरआन से जोड़ा और इंसान को इंसान से मोहब्बत, भाईचारे और अमन का सबक दिया।
हमारे नबी ﷺ ने बेटियों का सम्मान और उनका ऊँचा दर्जा दुनिया को बताया। बेटी को बोझ नहीं, बल्कि रहमत समझने की सोच दी। आज सरकार भी “बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ” जैसे अभियानों के माध्यम से बेटियों के सम्मान और शिक्षा का संदेश देती है। यह देखकर हमें खुशी होती है कि जिस बात का पैग़ाम हमारे नबी ﷺ ने सदियों पहले दिया, आज वही बात समाज में आगे बढ़ाई जा रही है।
इसी तरह हमारे नबी ﷺ ने पेड़-पौधों और हरियाली की अहमियत भी बताई। पेड़ हमारे लिए जीवनदायी हैं। वे हमें ऑक्सीजन देते हैं, पर्यावरण को बेहतर बनाते हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक सुरक्षित भविष्य तैयार करते हैं।
इसलिए मैं देवास की पूरी क़ौम से अपील करना चाहता हूँ कि 12 रबीउल अव्वल के इस मुबारक दिन हर व्यक्ति कम से कम एक पौधा ज़रूर लगाए। यह हमारे शहर, हमारे देश और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतरीन तोहफ़ा होगा।
मैं देवास शहर के दोनों क़ाज़ी साहिबान और तमाम शहरवासियों से भी गुज़ारिश करता हूँ कि 12 रबीउल अव्वल के दिन सुपरमार्केट चौराहे पर बच्चों के लिए तबर्रुक़ तक़सीम किया जाएगा। आप सभी वहाँ ज़रूर तशरीफ़ लाएँ और इस खुशी में शामिल हों।
हमारे राजनीति गुरु स्वर्गीय महाराज साहब ने हमेशा सभी समाजों को साथ लेकर चलने की मिसाल पेश की। उन्हीं की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए हम वर्षों से तबर्रुक़ तक़सीम करते आ रहे हैं और इसी मंच से जन्माष्टमी के अवसर पर भी सभी समाजों का स्वागत करते हैं। यही हमारे देवास की खूबसूरती है—जहाँ सभी धर्म और समाज मिल-जुलकर एक-दूसरे की खुशियों में शामिल होते हैं।
आख़िर में मैं अल्लाह तआला से दुआ करता हूँ कि हमारे दोनों क़ाज़ी साहिबान और सभी नेक अमल करने वाले लोगों को सेहत, तंदुरुस्ती और लंबी उम्र अता फरमाए। उन्हें हर बुरी नज़र से महफ़ूज़ रखे और हमारे शहर की अवाम पर उनका साया क़ायम रखे।
आइए, इस मुबारक दिन हम सिर्फ़ खुशी न मनाएँ, बल्कि अपने नबी ﷺ के बताए हुए रास्ते पर चलने का संकल्प भी लें—इंसानियत, भाईचारे, अमन, बेटियों के सम्मान और पर्यावरण की हिफ़ाज़त का संदेश हर घर तक पहुँचाएँ।
