मक्का मदीना में रुबात की सहूलतों से मेहरूम हुए हाजी, विधायक को डेढ़ सौ करोड़ का नोटिस, उलेमा खामोश
मक्का और मदीना में भोपाल की बेगमात के जरिए बनाई गई रुबात से मेहरूम भोपाल रियासत के हाजियों का मामला अब सड़क पर आ चुका है।
अंसारुल हसन सिद्दीकी भोपाल
मक्का और मदीना में भोपाल की रुबात का मामला व्यक्तिगत होकर सड़क पर आ गया और जब विधायक आरिफ मसूद ने सवाल खड़ा किया तो उनको डेढ़ सौ करोड़ का मानहानि का नोटिस सुप्रीम कोर्ट वकील द्वारा दिया गया, इधर आरिफ मसूद का कहना है कि हाजियों के ठहरने की रुबात के लिए वह वह हर तरह की कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं
मगर हाजियों की परेशानी बर्दाश्त नहीं, इधर रिलायबल ग्रुप के अध्यक्ष सिकंदर हफीज का कहना है कि मैंने जो मानहानि का दावा किया है और उससे जो रकम आएगी उसको मैं हाजियों पर खर्च करूंगा, यह बयान बाजी चरम पर है मगर इसी के साथ एक बात और यह है कि शहर के उलेमा इस मामले में भी खामोश है जबकि सच्चाई यह है की सबसे अधिक उलेमा ही हज पर जाते हैं और उन्होंने इसका सबसे ज्यादा फायदा उठाया और उसके फजाईल भी बयान किए हैं मगर अब खामोशी लोगों की चर्चा का विषय है। मक्का और मदीना में भोपाल की बेगमात के जरिए बनाई गई रुबात से मेहरूम भोपाल रियासत के हाजी का मामला अब सड़क पर आ चुका है। मामले को उलझाने के लिए इससे संबंधित लोग अपने व्यक्तिगत लड़ाई को महत्व देने में लगे हैं। मामला सीधे तौर पर वक्फ बोर्ड की जवाब देही का है जिसमें मुतवल्ली सबा सुल्तान(मशहूर कलाकार सैफ अली खान की बहन) की भूमिका सवालों के घेरे में है
मगर इस मामले में उन्होंने जो अपने निजी कार्य हेतु जो टीम बनाई है उसकी कानूनी हैसियत कुछ भी नहीं, मगर उनका दखल सीधे तौर पर मौजूद है और उस टीम में रिलायबल ग्रुप के अध्यक्ष सिकंदर हफीज का नाम सबसे आगे है। सूत्रों का कहना है कि सऊदी सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सबा सुल्तान को तलब किया था मगर वह नहीं पहुंची, जिसके कारण और सऊदी न्यायालय ने पहले उन्हें निलंबन और उसके बाद बर्खास्त कर दिया इस मामले को बहुत हद तक दबाया गया मगर बाद में इसका खुलासा हुआ। यह मामला आज का नहीं है भोपाल की तीन बेगमात ने समय-समय पर इन रुबात को बनवाया, और हाजियों के लिए वक्फ किया। भोपाल वक्फ बोर्ड में इसका उल्लेख है, इसलिए पूरी तौर पर उसकी जिम्मेदारी बनती है जो पूरी नहीं निभाई गई और उसके बाद एक उद्योगपति और एक विधायक को आपस में लड़ा दिया गया। ताकि मामला मुद्दे से भटक जाए ।
वक्फ संपत्ति का हिसाब मांगना
वक्फ संपत्ति का हिसाब मांगना हर मुसलमान का नैतिक दायित्व और कर्तव्य है क्योंकि वह वक्फ होने के बाद किसी की मिल्कियत नहीं रह जाती और वह विशुद्ध रूप से जिस कार्य के लिए वक्फ की गई है, इसका इस्तेमाल उसे प्रकार नहीं किया जाता तो फिर कोई भी मुसलमान सवाल खड़े कर सकता है। मगर जब यहां पर सवाल खड़ा किया जाता है तो चुने हुए विधायक को डेढ़ सौ करोड़ का नोटिस मानहानि थमा दिया जाता है।
किस बात की है पर्दा दारी
सौ टके का एक सवाल है कि जिस मामले को पूरी तरह से निष्पक्ष होना था और अवाम को गलतफहमी ना पैदा होती पारदर्शिता के साथ मामले को सामने रखा जाता उसको इस प्रकार न रखकर तथ्यों को छुपाया जाता है। यह बात सही है की मक्का और मदीना में विकास कार्य प्रगति पर है और बड़ी-बड़ी बिल्डिंगों को तोड़ा गया है उसी में यह भी शामिल है मगर जिसको तोड़ा गया उसका मुआवजा, कितना मिला और कहां है, इसी के साथ जो अन्य बिल्डिंग है साल भर उसमें क्या होता है उसकी आमदनी का स्वरूप क्या है यह स्पष्ट होना भी जरूरी है।

विचित्र पावर ऑफ अटॉर्नी
पावर आफ अटॉर्नी, अर्थात मुख्तारनामा, यह अधिकार पत्र विशेष रूप से स्वयं की मिल्कियत के लिए होता है मगर कानून के जानकारी का कहना है कि वक्फ मामलों में पावर ऑफ अटॉर्नी उचित नहीं है क्योंकि वह संपत्ति स्वयं अब उसकी नहीं है उसको वक्फ कर दिया गया। मामला चुकी अलल औलाद का है इसलिए वाकिफ की औलाद उसकी मुतावल्ली होती है। कानूनी हैसियत से जो शाही औकाफ के जो कारिंदे है वह कानूनी एतबार से जिम्मेदार नहीं है मगर उनके द्वारा मुतावल्ली को जो भ्रमित किया जा रहा है और उसके कारण मक्का मदीना के अलावा शहर भोपाल, रायसेन सीहोर क्षेत्र में एग्रीकल्चर लैंड के अलावा जो ऐतिहासिक मस्जिदे हैं मकबरे हैं, मजारे हैं, कब्रिस्तान है वह सब अस्त व्यस्त हैं।
रुबात के लिए कुछ भी करूंगा : विधायक आरिफ मसूद
मध्य विधायक आरिफ मसूद का कहना है कि मुझे सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी मिली है कि मुझे डेढ़ सौ करोड़ का नोटिस दिया गया है, जब मिलेगा तो उसके बारे में बात करूंगा मगर भोपाल रियासत के हाजियों की परेशानी से मैं परेशान हूं और उसके लिए मैं कोई भी कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हूं मेरा मकसद राजनीतिक नहीं है मेरा मकसद है कि जो बेगमात ने वक्फ किया था जिसके लिए उसका पालन हो और उसका फायदा सीधे तौर पर हाजियों को मिले। आरिफ मसूद ने कहा कि सब लोग जानते हैं कि केंद्र सरकार ने हाजियों की सब्सिडी बंद कर दी उससे बहुत सारे हाजियों को काफी नुकसान हुआ भोपाल रियासत के हाजियों को कुछ फायदा मिलता तो वह भी नहीं मिल रहा है, स्थिति को स्पष्ट होना चाहिए और मामला अल्लाह की अमानत का है तब तो पूरी तरह से पारदर्शिता के साथ मामले को सामने रहना चाहिए ताकि कोई भी मुसलमान सवाल करें तो उसको उपयुक्त जवाब मिले।
उलेमा की खामोशी
इस मामले का एक दूसरा पहलू बहुत ही दुर्भाग्य पूर्ण है। जिस रुबात मामले में उलेमा मोती मस्जिद में बड़े-बड़े बयान करते थे और मक्का मदीना में सबसे अधिक रुकने और ठहरने का मौका भी इन हजरात को मिला है। मगर इस वक्त सारे लोग खामोश हैं यह मामला सियासी नहीं है और ना ही किसी भी प्रकार का किसी का निजी मामला है बल्कि यह विशुद्ध रूप से धार्मिक अमानत का मामला है मगर सभी की खामोशी सवाल खड़ा करती है कि आखिर उलेमा कब बोलेंगे।

भोपाल से वरिष्ठ पत्रकार, वक़्फ़ मामलों के गहरे जानकार “अंसारुल हसन सिद्दीकी” की वाक़िफ खबर के लिए खास रिपोर्ट
