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Vaqif Khabar

बिगाड़ के डर से ईमान की बात ना कहोगे,लिखने वाले प्रेमचंद की महाजनी सभ्यता।

ByM. Farid

Oct 11, 2021

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देवास| महान साहित्यकार उपन्यासकार मुंशी प्रेमचंद की 85 वर्ष स्मृति दिवस पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस 125 वीं जंमवार्षिकी समारोह आयोजन कमैटी देवास द्वारा ललित कला अकादमी व शोध संस्थान में प्रेमचंद के प्रसिद्ध लेख “महाजनी सभ्यता” पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गह जिसमें देवास के साहित्यकारों ने अपने विचार व्यक्त किए| गोष्ठी की शुरुआत मुंशी प्रेमचंद के चित्र पर पुष्प अर्पण के साथ हुई| विचार गोष्ठी में वक्तव्य रखते हुए नेताजी सुभाष चंद्र बोस 125 वीं जंमवार्षिकी समारोह आयोजन कमेटी की प्रदेश सचिव श्रीमती रचना अग्रवाल ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद के विचार आज भी प्रासंगिक है, मुंशी प्रेमचंद ने “महाजनी सभ्यता” में तत्कालीन जिन सामाजिक स्थिति को दर्शाया था वे आज भी हुबहू समाज में विधमान है| इस व्यवथा में रिश्ते, नाते, प्रेम, आदि सब को व्यापारिक दृष्टि से देखा जा रहा है| पहले समय जीवन होता था आज समय पैसा हो गया है| गोष्ठी को
रिटायर प्रोफेसर एस एन त्रिवेदी, साहित्य प्रेमी बहादुरसिंह पटेल ज्योति देशमुख बिंदु तिवारी और दिनेश पटेल आदि ने भी संबोधित किया, गोष्ठी की अध्यक्षता मोहन जोशी जी ने की व संचालन वाणी जाधव ने किया| कमेटी सदस्य व देवास शहर के गणमान्य नागरिक, व साहित्यकार विचार गोष्ठी में शामिल रहे|

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