देवास 13 नवम्बर 2021/ मध्य प्रदेश सरकार की वन अधिकार अधिनियम योजना जनजाति वर्ग के लिए वरदान साबित हुई है। प्रदेश सहित देवास जिले में भी वन अधिकार अधिनियम के तहत जनजाति वर्ग के नागरिकों को वन अधिकार पत्र दिये जा रहे है। वन अधिकार अधिनियम जनजाति वर्ग के नागरिकों की जिन्दगी में रोशनी की किरण बनकर आई है। उन्हें घर बनाने के लिये और खेती के लिए जमीन मिलने से उनके जीवन की दिशा ही बदल गई है।
देवास जिले की तहसील बागली के ग्राम रायसिंहपुरा में श्री गोपीचंद पिता रूपसिंह एवं उनके पूर्वज वनांचल में कई पीढि़यों से निवास कर रहे है, वन भूमि का अधिकार पत्र न होने से इन्हें एवं इनके परिवार को शासन की योजनाओं का लाभ मिलने में कठिनाई आती थी, एवं वन भूमि का मालिकाना हक ना होने से इन्हें वन भूमि से बदखली का भय बना रहता था।
अनुसूचित जाति एवं अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यता) अधिनियम अंतर्गत श्री गोपीचंद पिता श्री रूपसिंह का ग्राम सभा में दावा प्राप्त किया गया जिसे वन अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप साक्ष्यों एवं बुजुर्गों के कथन के आधार पर दावा मान्य किया गया और श्री गोपीचंद पिता श्री रूपसिंह को वनाधिकार हक प्रमाण पत्र (0.494 हे.) प्रदान किया गया तथा वन भूमि का मालिकाना हक दिया गया।
वन अधिकार हक प्रमाण पत्र मिलने से अब श्री गोपीचंद को शासन की योजनाओं का लाभ आसानी से प्राप्त हो रहा है, इन्हे वन भूमि का मालिकाना हक मिलने से खेतों को बेहतर करने के लिए शासन द्वारा संचालित कपिलधारा कूप योजना से लाभ दिया है। अब श्री गोपीचंद पिता श्री रूपसिंह अपना एवं अपने परिवार के साथ बेहतर एवं खुशहाल जीवन यापन कर रहे हैं।
देवास जिले में वनाधिकार अधिनियम से श्री गोपीचंद को मिला वन भूमि का मालिकाना हक, वन अधिकार अधिनियम योजना जनजाति वर्ग के लिए हुई वरदान साबित
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