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Vaqif Khabar

डूबे हुए जितेंद्र का मीठे तालाब में दो दिनों से कोई पता नहीं।क्या सच में तालाब में कोई है

ByM. Farid

Nov 22, 2021

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जितेंद्र कुमार अवचर पिता जगदीश अवचर मजदूरी का कार्य करता था काका के साथ मछली खरीदने रविवार की पर तालाब के सामने लगने वाली मछली आया था लेकिन मछली की दुकानें खुली नही थी।इसलिए मन मे आया कि तालाब पर नहा लेता हूं काका ने मना भी किया कि तलाब ऐसा नहीं है जिसमें नहाया जा सके लेकिन जितेंद्र ने उनकी ना मानते हुए खुद को यह बता कर कि मैं नर्मदा नदी का तैराक हूं इस तलाब को आसानी से पार कर लूंगा तालाब के सामने कोने पर पर लगी हुई सांची पॉइंट के मालिक ने भी उसे से मना किया किंतु ना मानते हुए जितेंद्र ने तलाब में छलांग लगा दी और कुछ दूर जाकर शायद उसकी साँस फूलने लगी या जो हुआ इसका सिर्फ अंदाजा लगाया जा सकता है लेकिन तालाब में जाने के बाद जितेंद्र तालाब के बीच पहुँच कर ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगा आसपास के लोग उसे बचाने भी दौड़े लेकिन जितेंद्र वापस तालाब से निकल नही पाया जितेंद्र के काका चिंतित हो गए और तथा प्रशासन तक खबर पहुंचाकर रविवार से सर्चिंग का काम शुरु करवाया जो कि सोमवार दिन भर जारी रहा नाहर दरवाजा टीआई लोकेंद्र कुमार व्यास स्वयं खुद रेस्क्यू ऑपरेशन को लीड कर रहे थे सोमवार को भी जब आधे दिन से ज्यादा निकल गया और जितेंद्र की बॉडी का कोई पता नहीं चला तब नाहर दरवाजा टीआई है पानी में देखने वाला कैमरा मंगवाया जोकि बोरिंग में यूज किया जाता है और नाहर दरवाजा थाना निरीक्षक खुद नाव में बैठकर तालाब में कैमरे को डालकर जितेंद्र की बॉडी को ढूंढने लगे और जिस जगह लोगों ने जितेंद्र को डूबते हुए देखा था उस जगह पर काफी देर तक कैमरे को डालकर नाव में मौजूद एलईडी में पानी के अंदर का नजारा देखकर जितेंद्र की बॉडी को ढूंढने की कोशिश की गई घंटो तक प्रयास करने के बावजूद और काफी देर नाहर दरवाजा टीआई एवं अन्य गोताखोर सदस्य नाव में मीठा तालाब के काफी दूर तक जाकर जितेंद्र को तलाश करते रहे है लेकिन दिन ढलने तक दी जितेंद्र का कोई पता नहीं चला जितेंद्र को डूबे हुए 27 घंटे से अधिक का समय हो चुका है किंतु जितेंद्र की मृत शरीर का अभी तक कोई पता नहीं चला है मीठा तालाब जिसके बारे में लोगों के बीच तरह-तरह की अवधारणाएं मौजूद है हर साल करीब 4 से लेकर 5 लोग मीठा तालाब में डूब कर मर जाते हैं और इसी वजह से लोगों के बीच तरह-तरह की बातें प्रचलित है कि बीच तालाब में कोई तैरने वाले व्यक्ति का पाँव खींचने लगता है इस तरह की बातें इसलिए प्रचलित में आई क्योंकि काफी समय से मीठा तालाब में कई मौतें हो चुकी हैं जैसा कि जानकारी के अनुसार जितेंद्र नर्मदा नदी में तैरना जानता था और मीठे तलाब में तैरने के दौरान उसने एक मामूली सी दूरी तय की थी परिवार वालो के मुताबिक जितेंद्र एक होनहार तैराक था उसके बावजूद भी वह मीठे तालाब में डूब गया और ऐसे ही हादसों की वजह से लोगों के बीच मीठे तालाब को लेकर काफी भ्रांतियां मौजूद है वैसे तो जितेंद्र का शव अभी तक नहीं मिला है लेकिन नाहर दरवाजा TI LK व्यास की भूमिका काफी मानवतावादी है और जितेंद्र का शव को ढूंढने में उनका प्रयास काफी सराहनीय एवं प्रशंसनीय है।

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