मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड के बड़े वक्फ मैं से एक छोटी दरगाह रीवा की संपत्ति जो वक्फ बोर्ड के अधीन हैं जिसके निर्माण पर न्यायालय वक्फ अभिकरण स्थगन आदेश वक्फ अभी करण कोर्ट से लेकर जिला सत्र न्यायालय रीवा और हाई कोर्ट तक में रीवा जिला प्रशासन ने यह माना है कि यह वक्फ बोर्ड संपत्ति है और इस पर कोई भी निर्माण नहीं होगा मगर न्यायालय के स्थगन आदेश और वक्फ संपत्ति को नजरअंदाज करते हुए क्षेत्रीय विधायक एवं पूर्व मंत्री राजेंद्र शुक्ला तथा जिला प्रशासन के अनेक अधिकारियों ने वहां पर भूमि पूजन करना शुरू कर दिया है जिसकी पुष्टि स्वयं विधायक राजेंद्र शुक्ला के ट्विटर हैंडल से हो रही है जिसमें स्वयं उन्होंने इस बात को प्रमाणित किया है कि उन्होंने यहां पर भूमि पूजन किया है उल्लेखनीय है कि रीवा के इन महाशय विधायक पर पूर्व में भी वक्फ बोर्ड ने अवैध अतिक्रमण का प्रकरण चलाया है और अभी भी मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है जिन्होंने भारी-भरकम वक्फ बोर्ड की संपत्ति पर कब्जा किया हुआ है और इन्हीं के कहने पर अप्रत्यक्ष रूप से अनेक लोगों ने वक्फ बोर्ड की संपत्ति पर कब्जा किया हुआ है जिसमें मुस्लिम समाज के वे लोग भी शामिल हैं जो कभी पाला बदलकर कांग्रेसमें तो कभी भाजपा में हैं जिनका दावा है कि वह 50 बस के मालिक हैं और पूर्व कांग्रेसी मंत्री के चरण वंदन करके छोटी दरगाह के प्रबंधक बनना चाहते थे मगर अब वह विधायक राजेंद्र शुक्ला के संपर्क में हैं और फोटो में देखी भी जा सकते हैं सूत्रों के अनुसार खबर है कि खसरा नंबर 385 जिसका रकबा 8 एकड़ 55 डेसीमल और दूसरा नंबर 384 जिसका आरा जी रकबा 960 0 है जिसमें दुनिया के बड़े दरवेश मैं से एक हजरत ख्वाजा बुजुर्ग की दरगाह है जहां पर सभी धर्मों के के लोग जाते हैं इस भूमि का प्रकरण माननीय हाईकोर्ट की डबल खंडपीठ में विचाराधीन है इससे पूर्व वक्फ अभिकरण न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसला देकर लगभग 900 करोड़ की भूमि को सुरक्षित और संरक्षित करने के लिए ऐतिहासिक फैसला सुनाया था परंतु अतिक्रमण धारी कुछ मामलों में हाई कोर्ट अपील में है इसी दौरान जिला प्रशासन जिला रीवा ने कोर्ट को आश्वासित किया था कि किसी भी प्रकार का यहां पर अतिक्रमण नहीं होगा क्योंकि पूर्व से यहां पर अनेक शासकीय कार्यालयों का कब्जा है जिन को हटाने के लिए धारा 54 का प्रकरण और धारा 55 का प्रकरण विचाराधीन है क्षेत्रीय विधायक और शासन के अधिकारी यह जानते हुए भी कि वर्कबोर्ड की संपत्ति है और मामला न्यायालय में विचाराधीन है और इस पर न्यायालय का स्थगन आदेश है उसके बाद भी क्षेत्रीय विधायक ने दरगाह के समीप रातो रात खामोशी के साथ भूमि पूजन करके एक नए विवाद को जन्म दे दिया विवाद के साथ ही खुल्लम खुल्ला न्यायालय के आदेश की अवमानना की है इस संबंध में मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड के अधिकारियों से संपर्क किया गया परंतु उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया वही अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जिनके अधीन मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड है उनसे भी संपर्क स्थापित नहीं हो सका अब देखना होगा कि माननीय हाईकोर्ट जिसे समाचार पत्रों की खबर को संज्ञान में लेने का अधिकार है एवं किसी भी बात को स्वत संज्ञान में लेने का विशेष अधिकार है क्या वह इस मामले को संज्ञान में लेगी अदालत के आदेश अर्थात अदालत के स्थगन के बाद विधायक और जिला प्रशासन खुलेआम न्यायालय के आदेश की अवमानना करें प्रमाणित स्वयं विधायक राजेंद्र शुक्ला का ट्विटर हैंडल है
पत्रकार–अंसार उल हसन सिद्दीकी(अल्पसंख्यक मामलों कें जानकार)भोपाल की क़लम से 
