वक़्फ़ बोर्ड चुनाव:
डिफाल्टर, चुनाव नहीं लड़ सकता, वोट नहीं दे सकता, परन्तु बोर्ड मेंबर बन सकता है।
बहु चर्चित वक़्फ़ बोर्ड के मुतवल्ली चुनाव में चंदा निगरानी ओर वक़्फ़ का हिसाब देने वाला वक़्फ़ बोर्ड के अलिखित नियमों के अनुसार न तो वोट दे सकता है और न ही मुतावल्ली का चुनाव लड़ सकता है।
जी हां डिफाल्टर को बोर्ड का मेम्बर नियुक्त किया जा सकता है। यह कारनामा वक़्फ़ बोर्ड के गठन में शीघ्र होने जा रहा है।
बोर्ड में तीन सदस्यों को सरकार द्वारा नामांकित किया जाने वाला है जिनके नाम भी सामने आ चुके हैं जिनमेँ से एक सदस्य शिया दाउदी बोहरा में से भोपाल के मेहबूब हसन का भी नाम सामने आया है। महबूब उस बोहरा जमात के हैं जिनके मध्य प्रदेश में 325 बोहरा औकाफ पर 4 करोड़ का चंदा निगरानी बकाया है जिसकी वुसुली के लिए बोर्ड ने सैयदना के खिलाफ आर आर सी जारी की हुई है। सैयदना वक़्फ़ अधिनियम के अनुसार 325 वक़्फों का हिसाब भी नहीं देते हैं। यह मुतवल्ली चुनाव में वोटर भी नहीं हैं।
खबरों के अनुसार ऐसे डिफाल्टर मुतवल्ली के प्रतिनिधि मेहबूब को बोर्ड का मेम्बर बनाया जा रहा है। यानी चंद निगरानी ओर हिसाब नहीं देने वाला वोट नहीं दे सकता चुनाव नहीं लड़ सकता मगर बोर्ड मेंबर बन सकता है।
