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Vaqif Khabar

नेताजी सुभाषचन्द्र बोस यादगार कमेटी ने आयोजित किया सांस्कृतिक कार्यक्रम व परिचर्चा

ByM. Farid

Jan 29, 2024

नेताजी सुभाषचन्द्र बोस की 127 वीं जयंती पर नेताजी सुभाषचन्द्र बोस यादगार कमेटी ने आयोजित किया सांस्कृतिक कार्यक्रम व परिचर्चा

देवास| नेताजी सुभाषचन्द्र बोस यादगार कमेटी देवास ने नेताजी सुभाषचन्द्र बोस की 127 वीं जयंती के अवसर पर स्थानीय सोनिया गांधी नगर में सांस्कृतिक कार्यक्रम व परिचर्चा का आयोजन किया गया| सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत, अभिनंदन नृत्य के साथ हुई, इसके बाद शुभम लोधी ने तू हिंदू बनेगा,ना मुसलमान बनेगा, ” इंसान की औलाद है इंसान बनेगा” रोहित ने “मेरे सपनों को जानने का हक रे” तथा बीराखेड़ी फ्री कोचिंग क्लास के बच्चों ने “तू ज़िन्दा है तो ज़िन्दगी की जीत में यकीन कर, अगर कहीं है स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर” जनगीतों की प्रस्तुतियां दी| वहीं भारत की बेटी, देश रंगीला, जैसे देश भक्ति गीतों पर डांस की प्रस्तुतियां दी गई| सांस्कृतिक कार्यक्रम का संचालन विजय मालवीय ने किया | सांस्कृतिक कार्यक्रम के बाद परिचर्चा की शुरुआत हुई| शुरुआत में अतिथियो ने नेताजी सुभाषचन्द्र बोस के चित्र पर पुष्प अर्पित किए| परिचर्चा में वक्तव्य रखते हुए मुख्य अतिथि नेताजी सुभाषचंद्र बोस यादगार कमेटी की प्रदेश सचिव श्रीमती रचना अग्रवाल ने कहा कि नेताजी सुभाषचन्द्र बोस ने कहा था कि “इंसानियत हासिल करने का एकमात्र तरीका है इंसानियत के विकास में हर बाधा को चकनाचूर कर डालना। जब जहां अत्याचार अन्याय व दुराचार होते देखो वहां निडर दिल से सर ऊंचा उठाकर विरोध करो और उसे दूर करने की जी-जान से कोशिश करो|” नेताजी सुभाषचन्द्र बोस ने हमें हर तरह के अन्याय से मुकाबला करना सिखाया है, नेताजी सुभाषचन्द्र बोस ने तत्कालीन समस्याओें के खिलाफ संघर्ष किया था। नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के विचार आज भी प्रासंगिक है आम जन मानस को उनसे प्रेरणा लेकर एक बेहतर इंसान बनने की जरूरत है ,ताकि वे समाज व देश के विकास में योगदान दे सके| नेताजी सुभाषचंद्र बोस यादगार कमेटी देवास की सचिव वाणी जाधव ने भी अपने विचार व्यक्त किए कार्यक्रम का संचालन राजुल श्रीवास्तव ने किया व आभार श्रीमती मंजू अहिरवार ने किया| इस अवसर पर नेताजी सुभाषचंद्र बोस यादगार कमेटी के अध्यक्ष श्री मोहन जोशी, प्रख्यात साहित्यकार श्री बहादुर पटेल, कमेटी के उपाध्यक्ष श्री मोरसिंह राजपूत, श्रीमती कुशुम बांगड़े, ओ पी बांगडे, आदि ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम में बड़ी तादाद में बच्चे मौजूद रहे |

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