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एक बेसहारा हिंदू मरीज की मदद करता मुसलमान…. पैर में अल्सर और पेट खाली सरकार की किसी योजना का लाभ नहीं (पत्रकार अंसार उल हसन सिद्दीकी भोपाल की शानदार रिपोर्ट)
दुनिया की सबसे बड़ी भीषण गैस त्रासदी भले ही राजनीति का शिकार हो मगर अजय उपाध्याय जैसे लोग आज जिस प्रकार का जीवन जी रहे हैं उसे देख कर मानवता कांप ना जाए तो हैरत की बात है और जब परेशानी में शासन प्रशासन सरकार की स्कीम कहीं से कोई लाभ ना मिले और नफरत की दीवार भारत की संस्कृति में दीवार खड़ा कर दें पूछ उस वक्त में अगर किसी अजय उपाध्याय के लिए कोई मुस्लिम परिवार मदद करें तो आश्चर्य होना स्वाभाविक है मगर वह मदद सिर्फ इतनी हैं की मात्र दिन भर में पंद्रह बीस कमाकर किसी वक्त खाना और किसी वक्त भूखे सोना यह स्थिति है कहीं और नहीं राजधानी के वार्ड नंबर 12 नारियल खेड़ा की स्थिति है जहां पर अजय उपाध्याय हजार पंद्रह सौ का सामान लेकर एक पेड़ के नीचे अपना अल्सर का पैर लटका कर जिंदगी को पूरा कर रहा है इसको गरीबी रेखा का राशन कार्ड है ना आयुष्मान भारत का ना इसे कभी किसी योजना मे इलाज मिल सका और ना ही कोई मदद शासन की बयान वीर प्रतिनिधि पार्षद से लेकर सांसद प्रधानमंत्री तक और समाज के ठेकेदार गली मोहल्ले से लेकर बड़े-बड़े मठाधीश तक किसी ने इस बेचारे की नहीं सुनी जिसके पैर में एक छोटा सा जख्म नासूर बनकर अल्सर बन चुका है और चेक कराने पर क्या निकले यह डॉक्टर ही बेहतर बता सकते हैं इसकी दर्द भरी दास्तान यह है के गैस कांड के हादसे के समय यह भोपाल हमीदिया हॉस्पिटल में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी में था और गैस लगने के कारण यह 16 दिन वेंटिलेटर पर रहा वह बाद में वेंटीलेटर से उसे मृत घोषित कर दिया गया मगर लाश उठाने में देर क्या हुई के 7 दिन इसकी साथ वापस आ गई और यह फिर धीरे-धीरे ठीक हो गया मगर उसी समय इसके पैर में गैस के दुष्प्रभाव का पैर में हुआ और वह अब एक खतरनाक रूप में हो गया घर परिवार वालों ने इसको नजरअंदाज किया अजय उपाध्याय का कहना है कि जिस समय गैस कांड हुआ था उस समय में युवा नौजवान था और आज में जवानी की ढलान पर है घर में 3 लड़कियां हैं और एक लड़का है बच्चियों की शादी होना तो बहुत दूर उनको सही से खाना पीना भी समय पर नहीं मिल पा रहा इलाज को दरकिनार अपने जिंदगी पैर में पट्टी बांधकर निशातपुरा फाटक के पास श्रीनगर रोड किनारे एक पेड़ के नीचे एक मुस्लिम समाजसेवी द्वारा मदद किए जाने के बाद उन पैसों से बीड़ी सिगरेट बेचकर जिंदगी बसर कर रहा है उसके घर की कहानी उसके स्वाभिमान में छुपी है मगर अगर वह स्वाभिमानी है सरकार के उद्योगों का क्या हुआ जो यह कहती है हर घर को घर हर बीमार को इलाज और हर व्यक्ति के लिए हर एक प्रकार की योजना है स्वर्ण समाज का यह गरीब पंडित हर प्रकार से मायूस होकर भी भीख नहीं मांगता उसका स्वाभिमान जिंदा है और खुलेआम यह कहता है हिंदू मुस्लिम भाईचारा अभी जिंदा है मुस्लिम समाज के लोग मेरी मदद ही नहीं करते बल्कि मेरा ख्याल भी रखते हैं और जब तक आपसी भाईचारा रहेगा मुस्लिम भाई मुझे मदद करते रहेंगे लेकिन एक सवाल शासन प्रशासन से यह है यह सरकार की योजनाएं चाहे गरीब रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाली हो चाहे आयुष्मान हो चाय अति गरीबी रेखा थी या फिर फ्री राशन मामला हो मुख्यमंत्री योजना से गरीबों की मदद हो अगर अजय उपाध्याय जैसे लोगों की मदद ना होगी तो फिर इसको क्या समझा जाए क्योंकि समाज का एक बड़ा तबका तो झोली फैला कर गली गली घर घर भीख मांग लेता है मगर जो लोग स्वाभिमानी है और एक सम्मानित घर आने के हैं शासन के साथ-साथ कुछ समाज के ठेकेदार चाहे वह कोई भी हो सामाजिक ठेकेदार हो या अधिकारी उनका कर्तव्य उनका दायित्व और उनकी अंतरात्मा कब जागेगी किसकी प्रतीक्षा रहेगी
