वक्फ बोर्ड चुनाव से पहले ही सवालों के घेरे में…… जानबूझकर पात्र मुतावल्लियों को कर दिया अपात्र…
भोपाल! हमेशा विवादों में रही राजधानी की एकमात्र मुस्लिम संस्था जिस प्रकार से हाई कोर्ट के चाबुक के बाद वक्फ बोर्ड का जो चुनाव करवा रही है वह अभी से सवालों के घेरे में है,सबसे पहले जो चर्चा का विषय है ₹100000 से अधिक चंदा निगरानी जमा करने वाले मुतावल्लियों को जानबूझकर छोड़ दिया गया जो वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को ईमानदारी से संभालने के कारण वक़्फ़ बोर्ड के कर्मचारियों की आंखों की किरकिरी बने हुए हैं लिहाजा वक्फ बोर्ड के कर्मचारियों ने जानबूझकर भोपाल रीवा जबलपुर उज्जैन सहित अन्य क्षेत्र के प्रभावी लोगों को वक्फ बोर्ड चुनाव से वंचित कर दिया है इसको लेकर वक्फ बोर्ड सीईओ वक्फ बोर्ड प्रशासक और वक्फ बोर्ड का चुनाव करा रहे आईएएस अफसर जेडीयू खान को आपत्ति दर्ज कराई गई है।मगर मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड के कर्मचारी अपनी हठधर्मिता पर आमादा हैं और बेशर्मी के साथ अपने जवाब में कहते हैं कि हमने नियमानुसार सब कार्य किया है!
मामला यह है कि इस समय मध्य प्रदेश के वक्फ बोर्ड सीईओ है वे यहां के कानून से पूरी तरह ना वाकिफ है और जो प्रशासक है वह भोपाल के एडीएम है जो पूरा समय कलेक्ट्रेट कार्यालय में देते हैं लिहाजा यहां के कर्मचारी अपनी मनमर्जी के चलते हठधर्मिता पर आमादा हैं इन लोगों ने अपने स्तर पर सीईओ को इतना डरा दिया है कि वह कोई भी कार्य यहां के बाबुओं की रजामंदी के बगैर नहीं कर पा रहे हैं! सबसे दुर्भाग्यपूर्ण पहलू यह है एक लाख से ऊपर के अधिक मुतावल्लियों को जो वोटिंग का अधिकार दिया गया है है,उनमें ज़्यादातर पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं और यहाँ तक कि ज़्यादातर के खिलाफ लोकायुक्त में मामले पेंडिंग हैं।और उन लोगों को भी वोटिंग में शामिल कर लिया गया है जिनका कार्यकाल पूरा हो चुका है और जिन पर वक्फ बोर्ड की जमीन बेचने से लेकर लोकल पुलिस थानों तक में धोखाधड़ी के आरोप लगे हुए हैं।परंतु वक्फ बोर्ड के कुछ कर्मचारियों के भारी संरक्षण चलते ऐसे मुतावल्लियों को वोटिंग का अधिकार मिल गया है।
वक्फ बोर्ड में एक भारी-भरकम गिरोह है जिसके सामने मजहब, ईमान,इस्लाम,कानून,कायदा,न्याय प्रक्रिया कुछ भी मायने नहीं रखती सिर्फ और सिर्फ झूठ के आधार पर और सांठगांठ के आधार पर अरबों खरबों रुपए की प्रॉपर्टी को दांव पर लगा दिया गया है।हालांकि ये कर्मचारी ऐसे हैं जो शासन की अनुदान पर नौकरी करने आए हैं और जिन की पेंशन का भी प्रावधान नहीं है ।मगर इनकी जांच करवाई जाए तो इन इन लोगों के पास अकूत जायदाद निकलने की आपार संभावना है।और ये सच जाँच एजेंसियों के सूक्ष्मदर्शी तकनीक से जाँच करने के बाद ही बाहर आ सकता है की इन लोगों के वक्फ बोर्ड के मकानों से लेकर फार्म हाउस और अपने घर परिवार के लोगों के नाम से अवैध संपत्तियां कितनी है और कहां कहां हैं।इन कर्मचारियों को कुछ राजनीतिक लोगों का संरक्षण समय समय पर प्राप्त होता है उसका लाभ इनको मिलता रहता है……
पदआसीन अध्यक्ष और सीईओ को करते हैं डबल सेल्यूट..
वक्फ बोर्ड के कर्मचारियों की कुल कहानी इतनी है यहां पर कोई भी अधिकारी रैंक का व्यक्ति नहीं है सभी लोग वक्फ बोर्ड के यूडीसी के ऊपर कोई नहीं है और यह विभाग शासन के अनुदान पर जीवित है मगर यहां के कर्मचारियों का इतिहास बहुत ही प्यारा है जो भी अधिकारी पद पर रहता है उसके लिए इतने वफादार रहते हैं की उसको बोतल में उतार लेते हैं और उसको यह बताने की कोशिश करते हैं यह मुस्लिम संस्था है और इसमें बहुत सारे कमाई के रास्ते हैं।
वक्फ अधिनियम 2005 का नहीं हो पा रहा पालन अदालत को करते हैं गुमराह…
सेंट्रल वक्फ अधिनियम 2005 के तहत देश के वक्फ बोर्ड का गठन 14 सदस्य का होगा और जो देश के छोटे वक्फ बोर्ड है जैसे अंडमान निकोबार दीप समूह में वहां पर 7 सदस्य भी वक़्फ़ बोर्ड हो सकता है।अधिनियम में कम से कम 7 सदस्य और अधिक से अधिक 14 सदस्यों का बोर्ड होना जरूरी है उल्लेखनीय है कि देश भर के जो बड़े वक्फ बोर्ड हैं उनमें मध्य प्रदेश का वक्फ बोर्ड बड़ा बोर्ड है जिसमें लगभग 10 लाख करोड़ से अधिक की संपत्ति है! इतने बड़े बोर्ड को सरकार अपने स्तर से इस बार फिर 7 सदस्यों का बोर्ड बनाना चाहती है जबकि नियम अनुसार आधा दर्जन से अधिक पूर्व मुस्लिम सांसद भी हैं और वर्तमान में भी दो मुस्लिम विधायक हैं परंतु वक्फ बोर्ड के कर्मचारी सरकार को ज्ञान दे रहे हैं के 7 सदस्य बोर्ड बनाकर सरकार अपना आदमी बैठा दे और न्यायालय को बता दिया जाए कि मध्य प्रदेश बोर्ड का गठन पूरा हो गया! इसमें जो पदेन सदस्य होते हैं उसमें विधायक भी होते हैं यदि 14 सदस्यीय बोर्ड बनता तो दोनों सदस्य विधानसभा के जो मुस्लिम है दोनों विधायकों को शामिल किया जाता मगर अब सिर्फ एक विधायक को शामिल करके दोनों मुस्लिम विधायकों को लड़ाने की कोशिश की जा रही है! मजेदार बात ही है कि यह ज्ञान वही वक़्फ़ बोर्ड के कर्मचारी दे रहे हैं जो शाम होने के बाद दोनों मुस्लिम विधायकों के घर पर हाजिरी भी देते हैं और वक्फ बोर्ड में आकर या मंत्रालय में जाकर दोनों विधायकों के खिलाफ अधिकारियों को भड़का आते हैं!…..
लगभग 10 लाख करोड़ से अधिक की संपत्ति …………
मध्य प्रदेश के गरीब मुसलमानों को यह जानकर हैरानी होगी उनके बाप दादा ने उनके बुजुर्गों ने उनके वलिओलिया आने वाली नस्लों के नाम जो संपत्ति अल्लाह की राह में दी थी जो वक्फ बोर्ड मैं दर्ज है मामूली तौर पर पुराने सर्वे के मुताबिक इस मिल्कियत की की कीमत लगभग 10 लाख करोड़ से अधिक की होगी मगर उसकी इनकम लगभग दो करोड़ से भी कम है कितनी ही वक्फ बोर्ड की जायदाद को यहां के ईमानदार कर्मचारियों ने या तो प्राइवेट कर दिया या शासन के खाते में डाल दिया यह सब कुछ करते हुए ना तो उनका हाथ काँपा ना दिल में दर्द हुआ! ………
निवर्तमान सीईओ के जाते ही फाइल हुई गायब…..
सरकार का रिकॉर्ड कभी गायब नहीं होता मगर यह बात मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड कर्मचारियों पर लागू नहीं होती हाल ही में पूर्व सीईओ के रिटायर होते ही कितनी ही फाइलें लापता हैं जिनको उनके हस्ताक्षर से बाबुओं के पास सुरक्षित रखा गया था बहुत सी ऐसी फाइलें भी थी जिसमें भ्रष्टाचार के मामले में सीईओ ने जांच करके मीडिया को ब्रीफ किया था और दोषी बोर्ड कमेटियों के खिलाफ कार्यवाही सुनिश्चित की थी वह फाइल अब मौजूद नहीं है वह हमेशा हमेशा के लिए दफन हो चुकी हैं और अब कोई यह नहीं पूछ सकता कि उस समय सीईओ ने क्या आदेश किए थे क्या उसका पालन हुआ इसी क्रम में वह बेचारी भी हैं जो एक लाख से अधिक के मुतवल्ली है मगर वक्फ बोर्ड के कर्मचारियों ने उन्हें चुनाव से वंचित कर लिया और जो भ्रष्टाचार में लिप्त है जिन पर वक्फ बोर्ड की कार्यवाही होना थी उसकी फाइल लापता हो चुकी हैं वह फाइल किसी इंसान की मौत की तरह कब्र में दफन हो चुकी हैं जिसको अब निकाला नहीं जा सकता जिसको बताया नहीं जा सकता…….
चुनाव अधिकारी आश्चर्य में…..
मध्यप्रदेश शासन वन विभाग में आईएफ एस वरिष्ठ अधिकारी हैं जिन्हें मध्यप्रदेश शासन में वक्फ बोर्ड गठन के लिए चुनाव अधिकारी नियुक्त किया है जब उनको मुतवल्ली कमेटियों के सूचीबद्ध को लेकर उनके संज्ञान में लाया गया तो वह यह जानकर हैरत में पड़ गए मानो वह यह कह रहे हो ऐसा मामला तो जंगल में लकड़ी चोर भी नहीं करते जैसा मामला वक्फ बोर्ड में देखने को मिल रहा है और यह सच्चाई, जिस प्रकार जंगल में इमारती लकड़ी मिट्टी पत्थर पत्ते सब शासन की अमानत माने जाते हैं उससे अधिक जवाबदेही मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड की संपत्ति की है जो किसी व्यक्ति विशेष की नहीं है यह खुदा की अमानत है और शासन की निगरानी में है। मगर एक पूरा अमला इस को मिटाने में लगा हुआ है!………..
सीनियर जर्नलिस्ट अंसारुल हसन सिद्दीकी,अल्पसंख्यक मामलों के विशेषज्ञ,भोपाल
