*संसद में बिजली संशोधन बिल 2022 दोबारा पेश किए जाने के खिलाफ मध्यप्रदेश बिजली उपभोक्ता एसोसियन व ऑल इंडिया यूनाइट्रेड यूनियन सेंटर (एआईयूटीयूसी) ने बिजली संशोधन बिल 2022 की प्रतियां जलाईं*
*दोपहर एक बजे पुष्कर मंडुक पर किया प्रदर्शन*
देवास| संसद में बिजली संशोधन बिल 2022 दोबारा पेश किए जाने के खिलाफ मध्यप्रदेश बिजली उपभोक्ता एसोसियन व ऑल इंडिया यूनाइट्रेड यूनियन सेंटर (एआईयूटीयूसी) संयुक्त रूप से पुष्कर मंडूक पर बिजली संशोधन बिल 2022 की प्रतियां जला कर विरोध जताया| प्रदर्शन को संबोधित करते हुए वाणी जाधव ने कहा कि मध्य प्रदेश की सरकार इस स्वयं निर्मित घाटे को दिखाते हुए आम जनता की गाढ़े पसीने की कमाई से बने बिजली क्षेत्र को बेचने की घोषणा कर चुकी है। एक लाख करोड़ की संपत्ति वाला बिजली क्षेत्र ₹1 महीना की लीज पर अदानी पावर ट्रांसमिशन कंपनी को 35 वर्ष के लिए सौंप दिया गया है । सरकार की इस नीति के खिलाफ बिजली कर्मचारी भी लगातार आंदोलनरत हैं । मध्य प्रदेश सरकार ने बिजली कर्मचारियों केअधिकारों के लिए भी कोई शर्त लगाने की आवश्यकता नहीं समझी और बिजली कर्मचारियों को पूरी तरह निजी कंपनियों के रहमों करम पर छोड़ दिया है। विनोद प्रजापति ने कहा कि देश के पूंजीपतियों के मुनाफे को सुनिश्चित करने के लिए 2003 में देश की तत्कालीन वाजपेई सरकार के द्वारा नया बिजली कानून बनाया गया था। जिसको कांग्रेस ने भी समर्थन दिया था। इस कानून के तहत विद्युत उत्पादन क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोल दिया गया ।जिसका अर्थवयवथा की बिजली अब आवश्यक सेवा के स्थान पर मुनाफा कमाने की वस्तु बन गई। राज्य विद्युत बोर्ड भंग कर दिए गए और राज्य विद्युत नियामक आयोग गठित किए गए। बिजली के उत्पादन, संचरण और वितरण तीनों क्षेत्रों को अलग अलग कर दिया गया और सरकार के नियंत्रण में तीन कंपनियां बनाने की व्यवस्था दी गई। बिजली अध्यादेश 2022 बिजली क्षेत्र को और अधिक हिस्सों में तोड़ने की छूट देता है। इसमें अनेक कंपनियां, फ्रेंचाइजी और सब- फ्रेंचाइजी बनाई जाएंगी। सब फ्रेंचाइजी को सरकारी लाइसेंस की भी जरूरत नहीं होगी ।इन सबको मुनाफा तभी मिल पाएगा जब बिजली के दाम बढ़ाए जाएंगे। बहुत समय नहीं हुआ है जब बिजली के दाम ₹2.50 प्रति यूनिट थे जो अब ₹8 प्रति यूनिट हो चुके हैं और ये पेट्रोल- डीजल की तरह लगातार बढ़ते रहेंगे। नया कानून निजी कंपनियों को बड़े मुनाफे की गारंटी तो देता है लेकिन हर नागरिक को बिजली मिलने की गारंटी नहीं देता है। इस कानून में प्रावधान है कि
सरकार के द्वारा क्रॉस सब्सिडी खत्म कर दी जाएगी, किसानों और गरीबों को सब्सिडी रहित भारी बिजली बिलों का भुगतान पहले करना होगा, उनकी सब्सिडी नगद के रूप में बैंक खाते में बाद में आएगी। जो गैस सिलेंडर की सब्सिडी की तरह किस दिन खत्म हो जाएगी पता भी नहीं चलेगा । इस कानून के अन्य प्रावधान बताते हैं कि
उपभोक्ता और कंपनी के बीच के विवाद कोर्ट और कानून के द्वारा नहीं बल्कि कंपनी के ट्रिब्यूनल के द्वारा हल किए जाएंगे ।उपभोक्ता को कोर्ट जाने का अधिकार नहीं होगा।बिजली कंपनी को अपनी निजी पुलिस और पुलिस थाना बनाने का अधिकार भी सरकार दे रही है। बिजली बिल वसूली के लिए उपभोक्ता की संपत्ति, घर ,जमीन कुर्क करने का अधिकार भी कंपनी को दिया गया है।बिजली अध्यादेश 2022 के मुताबिक राज्य विद्युत नियामक आयोग शक्तिहीन हो जाएंगे और केंद्र सरकार के अंतर्गत द इलेक्ट्रिसिटी कॉन्ट्रैक्ट एनफोर्समेंट कमेटी(EACA) बनाई जाएगी जिसके पास सभी अधिकार होंगे| सन 2012 में जब मध्य प्रदेश की तत्कालीन सरकार के द्वारा प्रदेश के तीन क्षेत्रों ग्वालियर उज्जैन व सागर में बिजली के निजीकरण का प्रयोग किया गया था ।तब जनता के द्वारा संगठित आंदोलन चलाया गया । जनता के जबरदस्त विरोध के कारण ही पूंजीपति सुभाष चंद्रा एंड ग्रुप की एस्सेल कंपनी ने सरकार के साथ अपनी डील रद्द कर दी थी| आज फिर आवश्यकता है उसी तरह के जुझारू संघर्ष की बिजली आज खाना, पानी की ही तरह जीवन की जरूरत बन गई है व्यक्ति अमीर हो या गरीब कोई भी बिजली के बगैर नहीं रह सकता। इसलिए सरकार को बिजली सब को उपलब्ध करवाने की जिम्मेदारी लेनी ही होगी । इसके लिए एक ईमानदार, जुझारू, दीर्घकालीन, विशाल जन आंदोलन चलाना समय की मांग है|
