मुस्लिम लीडरशिप की दलाली का नंगा सच, हुमायूं कबीर स्टिंग कांड
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की आहट के बीच राज्य का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। हाल ही में तृणमूल कांग्रेस की ओर से जारी किए गए एक कथित स्टिंग वीडियो ने बंगाल की राजनीति में भूचाल सा ला दिया है।
कुछ वक़्त पहले बाबरी मस्जिद की नींव पश्चिम बंगाल में रख कर चर्चा में आए “आम जनता उन्नयन पार्टी” (एजेयूपी) के प्रमुख और टीएमसी के पूर्व विधायक हुमायूं कबीर को इस वीडियो में भाजपा के साथ करोड़ों की डील करते हुए दिखाने का दावा किया गया है। वैसे हुमायूं कबीर इसे AI जनरेटेड वीडियो बता रहे है तथा ये उनके खिलाफ ममता बनर्जी और उनकी पार्टी की साजिश है भी बता रहे है।
लेकिन एक्सपर्ट का कहना है की वीडियो AI जनरेटेड ना होकर वास्तविक ज़्यादा दिखाई पड़ता है।
इसके अलावा जिस तरह से हुमायूं कबीर बहुत ही कम वक़्त में बंगाल में एक पार्टी खड़ी कर देते है तथा पश्चिम बंगाल में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM को गठबंधन के लिए मजबूर कर देते है उससे साफ ज़ाहिर होता है की हुमायूं कबीर मासूम मुस्लिम समाज का बाबरी मस्जिद के नाम पर पर सौदा करते नज़र आते है। और जिस तरह से वीडियो में 1000 करोड़ की बात की जा रही है उससे ये साबित होता है की हुमायूं कबीर को पश्चिम बंगाल में पार्टी खड़ी करने के लिए फंड्स भी मिले है।
हुमायूं कबीर की पार्टी से किसे फायदा होगा
पश्चिमी बंगाल की राजनैतिक समीकरण बहुत ही स्पष्ट है।पश्चिम बंगाल में 2026 तक मुस्लिम आबादी लगभग 28-30% होने का अनुमान है और वे लगभग 100 सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बैनर्जी की पार्टी TMC को तकरीबन 75% कुल मुस्लिम वोट मिला था जिसकी वजह से TMC पश्चिम बंगाल में सरकार बनाने में कामयाब हो पाई थी। अगर हुमायूं कबीर की पार्टी को मुस्लिम वोटर्स का साथ मिल जाता है तो वो खुद तो पूरे पश्चिम बंगाल में एक भी सीट नहीं जीत पाएंगे लेकिन भाजपा की सरकार बनाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते नज़र आते है।
वैसे वीडियो की सच्चाई फॉरेंसिक जांच का मसला है लेकिन फौरी तौर पर हुमायूँ कबीर का स्टिंग कांड मुस्लिम वोटर्स की दलाली का नंगा सच उजागर करता नज़र आता है।
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