रविवार को देवास जिले के ग्राम आगरोद में जो घटना दलित समाज की बारात के साथ हुई उसमें एक नया मोड़ आ गया।आगरोद गांव के सेंधव समाज ने पुलिस अधिक्षक देवास के नाम ज्ञापन दिया है की दलित समाज के दूल्हे को घोड़ी से उतारने का आरोप जो FIR में लगाया गया है वो गलत है।सेंधव समाज का कहना है कि बारात में कोई घोड़ी थी ही नहीं।क्योकि गाँव मे किसी भी घोड़ी वाले से घोड़ी किराए पर नही ली गई थी।दूल्हा बारात में मोटरसाइकिल पर घूम रहा था जिसका फ़ोटो भी ज्ञापन के साथ दिया गया है।
वही ज्ञापन में ये भी कहा गया है कि दूल्हे को मन्दिर में जाने से भी नहीं रोका गया।
आपको बता दे कि ग्राम आगरोद में हुई इस घटना की FIR पुलिस कोतवाली टोंकखुर्द में की गई है।पुलिस ने बारात पर हमला करने के मामले में 10 लोगों को आरोपी बनाया है।
सेंधव समाज के ज्ञापन के बाद अब ये सवाल उठने लगा है कि बारात में घोड़ी पर ना बैठने देने वाली बात में कितनी सच्चाई है ये गहन पुलिस जाँच का विषय है।
वैसे आगरोद में हुई घटना के बाद से ही देवास SP संपत उपाध्याय ने मोर्चा संभालते हुए काफी पुलिस बल आगरोद में लगा दिया था।ग्राम की स्तिथि अब सामान्य एवं पुलिस के नियंत्रण में है।
