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Vaqif Khabar

“जिनके हाथों में लिपटा हो लहू गरीबों का, उन हाथों में तिरंगा अच्छा नहीं लगता” नेताजी सुभाष चंद्र बोस यादगार कमेटी ने आयोजित की काव्यगोष्ठी

ByM. Farid

Dec 23, 2023

हमने इस मुल्क में ऐसे भी करिश्में देखे है , फूल मंदिर के भी मस्जिद में महकते देखे है ______________________________________
नेताजी सुभाष चंद्र बोस यादगार कमेटी ने आयोजित की काव्यगोष्ठी*

देवास| भारतीय आजादी आंदोलन की गैरसमझौता वादी धारा के महान क्रांतिकारी व काकोरी घटना के अमर शहीद रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाकउल्ला खान, ठाकुर रोशन सिंह व राजेंद्र लाहिड़ी की शहादत को याद करते हुए नेताजी सुभाष चंद्र बोस यादगार कमेटी देवास ने स्थानीय मंडी धर्मशाला में कौमी एकता, देशभक्ति व सम सामयिक विषयों पर स्वरचित कविताओं की काव्यगोष्ठी आयोजित की|
काव्य गोष्ठी में कवि श्री शुभम लोधी ने
” तुम और क्या जीतना चाहते हो, अब और क्या पाना चाहते हो ” का रचना पाठ किया
श्री मति कुशुम बांगड़े ने ” कितना प्यारा तिरंगा मेरा हर शहीद के दिल रहा” गीत पढ़ा
श्री राजुल श्रीवास्तव ने कहा
“एक चींटी की जब तमाम कोशिशें देखी,
जिंदगी फिर नई शुरुआत आ गई”
गुना से आए कवि श्री हरकांत “अर्पित” ने कहा
“जिनके हाथों में लिपटा हो लहू गरीबों का,
उन हाथों में तिरंगा अच्छा नहीं लगता”
मशहूर शायर अजीम देवासी ने कोमी एकता की ग़ज़ल पढ़ते हुए कहा
“हमने इस मुल्क में ऐसे भी करिश्में देखे हैं,
फूल मंदिर के भी मस्जिद में महकते देखे हैं ”

गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे प्रतिष्ठित कवि श्री बहादुर पटेल ने कविता पाठ करते हुए कहा कि
“यह दुनिया बहुत पुरानी हो गयी है इसकी मरम्मत की बहुत जरूरत है, जो इस दुनिया में फैला रहे हो नफ़रत उनके ताबूत में आखिरी कील की तरह ठोंक दो ”
कविताओं की प्रस्तुति दी|
सी.पी.डी.आर.एस. के प्रदेश संयोजक श्री लोकेश शर्मा ने वक्तव्य रखते हुए कहा कि बिस्मिल-अशफाक की कुर्बानी आजादी आंदोलन में दोस्ती की अमूल्य मिसाल है। उस समय में जब अंग्रेजी हुकूमत, समाज को जात-धर्म में बांटकर अपनी शोषणकारी नीतियों को भारत पर थोप रही थी व देश के अंदर सामाजिक एकता को कमजोर कर रही थी तब बिस्मिल-अशफाक ने साथ में मिलकर न सिर्फ आजादी की लड़ाई लड़ी बल्कि फांसी के तख्ते तक का सफर साथ में तय किया। ऐसी दोस्ती अमूल्य है । आज के समय में जहां लोग समाज से दूर होकर सिर्फ अपने स्वार्थ के बारे मे सोच रहे , छात्र – युवा चारो तरफ परेशानियाँ, उदासीनता देख रहे , ऐसे मे क्रांतिकारियों का विचार ही है जो छात्र – युवाओं को एक नया रास्ता ,इंसान बनने का रास्ता दिखा सकता।
काव्य गोष्ठी का संचालन राजुल श्रीवास्तव ने किया व आभार कमेटी के उपाध्यक्ष फरीद कुरैशी ने माना।
काव्य गोष्ठी में वाणी जाधव, श्री मोहन जोशी जी, श्री मोरसिंह राजपूत, तरुण, चिराग, विनोद, रोहित उपस्थित रहे।,

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