ख़जराना से मोहब्बत का पैग़ाम,मस्जिद “अल-फ़ज्र” बनी भाईचारे की मिसाल
इंदौर से संवाददाता अज़हर मिर्ज़ा की रिपोर्ट
इंदौर के सबसे बड़े मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र ख़जराना में स्थित मस्जिद अल-फ़ज्र सिर्फ़ इबादत की जगह नहीं, बल्कि मोहब्बत, भाईचारे और इत्तिहाद (एकता) की एक ज़िंदा मिसाल बन चुकी है, मस्जिद के बाहर लगा हुआ बैनर समाज को एक ऐसा पैग़ाम देता है, जो दिलों को जोड़ने वाला है,
बैनर पर साफ़ लिखा है कि
“मस्जिद अलफज्र में हर मस्लक व जमाअत से ताल्लुक़ रखने वाले लोग नमाज़ अदा करने आ सकते हैँ
ये अल्फ़ाज़ सिर्फ़ इबारत नहीं, बल्कि एक सोच हैं, एक ऐसा नज़रिया जो आज के बँटे हुए मुस्लिम समाज में बहुत कम देखने को मिलता है,जहाँ अक्सर मस्लक, फिरक़े और जमाअत के नाम पर दूरियाँ पैदा की जाती हैं, वहीं मस्जिद अल-फ़ज्र से मोहब्बत, इत्तिहाद, और आपसी भाईचारे का पैग़ाम दिया जा रहा है।
मस्जिद अल-फ़ज्र का ये क़दम एक सामाजिक सुधार की मिसाल है। ये हमें याद दिलाता है कि इस्लाम तफ़रीक़ नहीं, बल्कि इत्तिहाद सिखाता है; नफ़रत नहीं, बल्कि मोहब्बत सिखाता है; और दूरी नहीं, बल्कि क़रीबियाँ पैदा करता है।
मस्जिद अलफज्र के ज़िम्मेदार हाफ़िज़ सज्जाद सहाब का कहना है की मस्जिद अल्लाह का घर है और मस्जिद में अल्लाह की इबादत होती लिहाज़ा कोई भी मसलक का मुसलमान मस्जिद में नमाज़ अदा कर सकता है,
आपको बता दे की छोटे छोटे मसलों को लेकर मुस्लिम समाज में अलग अलग विचारधाराएं मौजूद है ऐसे में अगर कोई विपरीत विचारधारा का व्यक्ति किसी और मस्जिद में नमाज़ पढ़ने चला जाता है तो कई बार विवाद की स्थिति तक बन जाती है कुछ मामलों में तो पुलिस तक को दखल देना पड़ा है।ऐसे में मस्जिद अल फज्र शांति और भाईचारे का पैगाम देती नज़र आती है।
