देवास इंदौर बाईपास पर 14000 लीटर डीजल और पेट्रोल से भरा हुआ एक ट्रक जो कि मांगलिया से ताजपुर की ओर जा रहा था।टोल नाके पर पेट्रोल डीज़ल से भरे हुए ट्रक के केबिन में हुए शार्ट सर्किट की वजह से आग की चपेट में आ गया और देखते ही देखते ट्रक धू-धू करके जलने लगा।
टोल पर मौजूद सभी कर्मचारी अपनी जान बचाकर भागे।पूरा टोल प्लाजा खाली हो गया 4 से अधिक फायर ब्रिगेड की गाड़ियों मोके पर पहुची तथा देवास C.S.P. विवेक सिंह चौहान भी टोल प्लाज़े पर पहुँचे।
ट्रक के केबिन मे लगी आग की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि फायर ब्रिगेड की चार से अधिक गाड़ियों को आग बुझाने में
आधे घंटे से भी अधिक का समय लगा।वह तो अच्छा हुआ कि आग ट्रक के पिछले हिस्से में नहीं पहुंच पाई नहीं तो बहुत बड़ी अनहोनी हो सकती थी।
ट्रक के पिछले हिस्से में टैंकर में 14000 लीटर से भी अधिक डीजल और पेट्रोल भरा हुआ था अगर आग वहां तक पहुंच जाती तो काफी बड़ा धमाका हो सकता था
जिसकी वजह से पूरा टोल प्लाजा भी उड़ सकता था।
ट्रक के केबिन और टैंकर के बीच की प्लेट ने बचाई अनहोनी।
ट्रक के केबिन और टैंकर के बीच लोहे की एक मोटी प्लेट लगी हुई थी जिसकी वजह से आग की गर्मी केबिन से टैंकर तक नहीं सकी। ट्रक और केबिन के बीच लगी हुई मोटी प्लेट की
वजह से आज देवास शहर में एक बड़ा हादसा होने से टल गया
देवास इंदौर बायपास टोल प्रबंधन का अमानवीय चेहरा आया सामने।
आपको बता दें कि जब टैंकर में इतनी भयानक आग लगी थी तो उस समय टोल प्लाजा
के दोनों और काफी लंबी लाइन गाड़ियों की लग गई।फायर ब्रिगेड की गाड़ियों ने जैसे तैसे करके ट्रक में लगी आग को बुझाया।आग बुझाने के बाद भी इस बात का खतरा बना हुआ था कि कहीं ट्रक के पीछे के टैंकर में किसी तरह का कोई विस्फोट ना हो जाए इसीलिए एहतियातन देवास CSP वहां पर खड़े हुए थे ताकि टैंकर के निकट कोई जा ना सके। इसी बीच प्लाजा के दोनों ओर गाड़ियों की लंबी कतारें लग गई जब आग पूरी तरह बुझ गई तो टोल पर खड़ी हुई गाड़ियां आगे बढ़ी तो टोल पर मौजूद कर्मचारियों ने उनसे टोल वसूलना शुरू कर दिया
जिसकी वजह से गाड़ियों का काफी लंबा जाम टोल पर लगने लगा जब पुलिसकर्मियों द्वारा उन्हें मना किया गया कि अभी टोल न वसूले क्योकि खतरा अभी टला नही है,टैंकर अभी बीच टोल प्लाजा पर ही खड़ा है और उसमें 14000 लीटर डीज़ल पेट्रोल भरा है और अगर उसमें आग लग गई तो गाड़ियों के जाम लगने से बड़ी जनहानि हो सकती है जिस पर टोल कर्मचारी पुलिसकर्मियों से बहस करने लगे उसके बाद एक कर्मचारी को पुलिसकर्मी ने पकड़ कर पुलिस की गाड़ी में बैठाया
तब कहीं जाकर कंपनी प्रबंधन ने टोल को खोला जिससे जल्दी जल्दी गाड़ियां निकलने लगी।
