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Vaqif Khabar

क्या अडानी के लिए अशुभ साबित हुआ NDTV ?

ByM. Farid

Feb 4, 2023

क्या अडानी के लिए अशुभ साबित हुआ NDTV ?

वैसे तो विज्ञान के इस आधुनिक दौर में शुभ और अशुभ की बातें करना पिछड़ापन माना जाता है, लेकिन यह भी एक कटु सत्य है कि देश के जितने भी व्यापारी है वह जब भी किसी नए संस्थान या व्यापार के बारे में प्लानिंग करते हैं तो वह अपने -अपने धर्म गुरुओं या ज्योतिष पंडितों से ज़रूर पूछ लेते हैं। और फिर अगर बात गौतम अडानी की, की जाए तो यह हो ही नहीं सकता कि उन्होंने जब एनडीटीवी खरीदा होगा तो अपने ज्योतिषाचार्य से मशवरा नहीं किया होगा।
एनडीटीवी देश के उन चैनलों में गिना जाता था जो मोदी सरकार की नीतियों को लेकर हमेशा सवाल खड़े करता था। या यूं कहा जाए कि यह चैनल देश का एक ऐसा वर्ग जो ज्यादातर चैनलों की कार्यशैली से संतुष्ट नहीं होता था वह एनडीटीवी पर खबरों के लिए भरोसा करता था।
यहां एक बात का जिक्र करना बहुत ज्यादा जरूरी है कि शुभ और अशुभ असल में सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा को ही प्रदर्शित करते हैं ऐसे में जब एनडीटीवी को गौतम अडानी ने खरीदा तो उसके वह दर्शक जो एनडीटीवी को इसलिए पसंद करते थे क्योंकि एनडीटीवी मोदी सरकार और उनके सहयोगी व्यापारी मित्रों को जमकर आड़े हाथों लेता था। साफ शब्दों में कहा जाए की एनडीटीवी का दर्शक गौतम अडानी को पसंद नहीं करता था। ऐसे में जब उस दर्शक को यह मालूम पड़ा होगा कि गौतम अडानी ही एनडीटीवी के मालिक हो गए हैं तो उनमें कितनी नकारात्मक ऊर्जा प्रवाहित हुई होगी इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है, यह भी कहा जा सकता है कि उस नकारात्मक ऊर्जा की चपेट में गौतम अडानी आ गए।
एनडीटीवी से चर्चा में आए रवीश कुमार जिन्होंने एनडीटीवी का सौदा होते ही उससे इस्तीफा दे दिया था और जब अपना यूट्यूब चैनल शुरू किया तो मात्र महीना भर में ही रवीश कुमार के यूट्यूब चैनल पर 4 मिलियन से भी ज्यादा सब्सक्राइबर हो गए और रोजाना आने वाली उनकी वीडियो को लाखों दर्शक देखते है। और यह जगजाहिर है कि किस तरह रविश कुमार गोदी सेठ के बहाने गौतम अडानी पर निशाना साधते रहते हैं और उनकी इन ख़बरों को लाखों लोगों द्वारा देखा और पसंद किया जाता है मतलब एनडीटीवी के दर्शक गौतम अडानी को पसंद नहीं करते थे। रवीश कुमार के एनडीटीवी छोड़ देने पर उनके यूट्यूब चैनल पर शिफ्ट हो गए और इन्हीं दर्शकों की नकारात्मक ऊर्जा ने गौतम अडानी के शेयर मार्केट को धड़ाम से गिरा डाला।

अडानी समूह की कुल मिल्कियत को अगर जोड़ा जाए तो एनडीटीवी उसके सामने ऊंट के मुंह में जीरे के समान था लेकिन फिर भी गौतम अडानी ने क्या खरीदा और क्या बेचा ये लोगों को नहीं मालूम था लेकिन जिस दिन उन्होंने एनडीटीवी खरीदा तो देश के बच्चे-बच्चे की ज़बान पर इस सौदे का जिक्र था ।और यह सभी जानते है कि गौतम अडानी ने NDTV क्यों खरीदा।मस्तिष्क की ये लड़ाई जो गौतम अडानी और एनडीटीवी के दर्शकों के बीच चल रही थी इतनी जबरदस्त नकारात्मक ऊर्जा प्रवाहित कर रही थी।इसे समझने में गौतम अडानी नाकाम रहे। और गौतम अडानी नकारात्मक उर्जा की इस सुनामी का शिकार हो गए।

हिंडनबर्ग ने अपने 115 पन्ने की रिपोर्ट का काला चिट्ठा गौतम अडानी समूह पर तैयार किया है वह उसके कई महीनों की मेहनत का नतीजा होगा।यह महज़ एक इत्तेफ़ाक़ हो सकता है कि हिंडननबर्ग की रिपोर्ट गौतम अडानी के एनडीटीवी खरीदने के कुछ समय बाद ही सामने आ गई और इस रिपोर्ट की वजह से गौतम अडानी को लाखों करोड़ों ₹ का नुकसान उठाना पड़ा यानी कि अंत में यह कहा जा सकता है कि NDTV का सौदा अडानी के लिए काफी अशुभ साबित हुआ।

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