देवास
देवास में शनिवार को चल रही नेशनल लोक अदालत मे प्रधान जिला न्यायाधीश देवास श्री प्रभात कुमार मिश्रा ने जब बैंकों के काउंटर पर भारतीय स्टेट बैंक के टेबल के सामने कुर्सी पर बैठे हुए एक व्यक्ति को देखा तो माजरा समझने की कोशिश की। कुर्सी पर बैठे हुए शख्स का नाम से शेरअली था। 
जिसने बैंक से लोन लिया था और उसका पांव टूट जाने की वजह से वह पूरा लोन अदा करने में सक्षम नहीं था। प्रधान न्यायाधीश श्री प्रभात कुमार मिश्रा ने कहा कि चूँकि लोक अदालतों के माध्यम से लोगों को फायदा पहुंचाने की कोशिश की जाती है,प्रधान न्यायाधीश ने बैंक वालों से कहा कि शेर अली के लिए कोई अच्छा रास्ता निकालने की कोशिश करें।
शेरावाली का कहना था कि मैं रुपये 20000 लेकर आया हूं मेरी पांव टूट चुका है और मेरे लिए रकम का इंतजाम करना काफी मुश्किल है।वहीँ स्टेट बैंक के चीफ मैनेजर मिनाज अहमद का कहना था कि शेर अली का गवर्नमेंट स्पॉन्सर्ड स्कीम में एक लोन है। जिसमे आउटस्टैंडिंग(कुल बकाया) करीब दो लाख रुपये हो चुका है करोना काल में भी शेर अली ने कुछ भी रुपया नहीं भरा है उसके बावजूद बैंक इस लोन को 80000 से भी कम रकम में सेटल करने को तैयार है ।
अंत में शेर अली ने बैंक वालों की बात मानते हुए 20000 रुपये जमा करते हुए बाकी की रकम के लिए मार्च 2023 तक का समय ले लिया।
ऐसे ही प्रकरणों के निपटारे से लोक अदालतों का आयोजन सफल साबित होता है
