बिजली के निजीकरण ,बिजली संसोधन विधेयक 2022 ,प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाने की नीति के खिलाफ बिजली उपभोक्ताओं का अखिल भारतीय खुला अधिवेशन हुआ संपन्न….
आज 8 अप्रैल को स्थानीय नीलम पार्क भोपाल में AIECA के द्वारा प्रथम अखिल भारतीय विद्युत उपभोक्ता सम्मेलन आयोजित किया गया।इस सम्मेलन में बिजली के निजीकरण को बंद करने,बिजली कानून 2003 और बिजली संसोधन विधयेक 2022 को रद्द करने,प्रीपेड स्मार्ट मीटर की नीति वापिस लेने,आम उपभोक्ताओं की सब्सिडी बरकरार रखने सहित 14 सूत्रीय मांगे केंद्र व राज्य सरकार के समक्ष रखी गई।सम्मेलन का उद्घाटन श्री शैलेन्द्र दुबे ,चेयरमैन ऑल इंडिया पॉवर इंजीनियर्स फेडरेशन एवं विद्युत क्षेत्र के विभिन्न गणमान्य लोगों द्वारा किया गया।सम्मेलन को संबोधित करते हुए AIECA के राष्ट्रीय महासचिव श्री समर सिन्हा ने कहा कि, वर्तमान में बिजली एक आवश्यक उपयोगिता है जिसके बिना आधुनिक सभ्यता एक क्षण भी नहीं चल सकती।
स्वाभाविक रूप से, बिजली को वर्तमान में लोगों की आजीविका के मौलिक बुनियादी अधिकार के रूप में माना जाना चाहिए उनकी आर्थिक स्थिति चाहे जो भी हो।
स्वतंत्रता के बाद, बिजली उद्योग को सरकार के नियंत्रण में लाया गया था और बिजली आपूर्ति (1948) – अधिनियम पारित किया गया था।
कानून का मुख्य उद्देश्य था
(1) उपभोक्ताओं के सभी वर्गों को सस्ती दर पर बिजली उपलब्ध कराना।
(2) सिंचाई पंप सेटों के माध्यम से बिजली को खाद्य सुरक्षा की रीढ़ बनाना।
(3) उद्योगों, रेलवे और परिवहन के अन्य साधनों और संचार आदि के विकास के लिए मदद करना।
सरकारी खजाने की कीमत पर राष्ट्रव्यापी ग्रिड नेटवर्क का निर्माण करने के बाद, हमारे देश के निजी मालिक पिछली सदी के अंत में इस कोर सेक्टर में निवेश करने के लिए आगे आए और उनके हित के लिए बिजली अधिनियम -2003 निजी मालिकों को जनरेशन के क्षेत्र में प्रवेश प्रदान करने के लिए अधिनियमित किया गया। कहने की आवश्यकता नहीं है, उक्त अधिनियम अपने बहुप्रचारित घोषित उद्देश्यों को पूरा करने में विफल रहा है और कॉर्पोरेट के लिए अप्रत्याशित लाभ और आम उपभोक्ताओं के लिए कष्टों की सौगात लेकर आया।
यह घोर दु:ख का विषय है कि जब पूरा देश कोविड-19 महामारी की भीषण मार झेल रहा था, केंद्र सरकार ने हितधारकों के साथ विशेष रूप से उपभोक्ताओं के साथ कोई परामर्श किए बिना, विद्युत विधेयक -2022 को लागू करने की पहल की ताकि निजी ऑपरेटरों के हित में पूरे देश में बिजली वितरण प्रणाली का निजीकरण किया जा सके।
विद्युत विधेयक-2022 का मुख्य उद्देश्य बिजली के चरित्र को एक आवश्यक उपयोगिता से लाभ कमाने वाली वस्तु में बदलना है, जिससे आम उपभोक्ताओं और किसानों के अब तक प्राप्त अधिकारों को छीन लिया जा सके।
इस विकट स्थिति में केंद्र सरकार के जघन्य मंसूबों को परास्त करने के लिए ही यह सम्मेलन नींव का काम करेगा।
सम्मेलन में विभिन्न वक्ताओं ने अपनी बात रखी।अध्यक्षीय उदबोधन AIECA के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सपन कुमार घोष ने दिया।
उन्होंने बताया कि AIECA के द्वारा लगातार बिजली सभी को मुहैया कराने की मांग पर देश भर में आंदोलन चला रहा है
आंदोलनों के क्रम में संघर्ष को मजबूत और तेज करने के लिए बिजली उपभोक्ताओं का पहला अखिल भारतीय सम्मेलन आज हो रहा है जिसमे 17 राज्यों के प्रतिनिधि व भोपाल की आमजनमानस शामिल हुए हैं।
सम्मेलन का उद्देश्य बिजली क्षेत्र के निजीकरण, प्रतिगामी बिजली विधेयक-2022 के खिलाफ और आम उपभोक्ताओं और किसानों की न्यायोचित और जायज मांगों के लिए देशव्यापी ताकतवर आंदोलनों का निर्माण करना है।लड़ेंगे तो जीतेंगे जरूर।9 अप्रैल को प्रतिनिधि अधिवेशन गांधी भवन में आयोजित होगा।कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों में हिस्सा लिया।बिजली का निजीकरण रोक दो सहित जोरदार नारों के साथ खुले अधिवेशन की समाप्ति हुई।
